Hindi Sample Question Paper Class 12 Term-1 2021-22

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Iss post me aap dekhoge👁️👁️ CBSE ki class 12th ki subject hindi📝 ka sample paper📃 term-1 2021-2022 hindi medium🇮🇳 ke students👩‍🎓👨‍🎓 ke liye.

विषय हिंदी (ऐच्छिक) प्रश्न पत्र

कॉड: 002
कक्षा: बारहवीं
समय: 1 घंटा 30 मिनट
पूर्णांक: 40
सामान्य निर्देश:

  • इस प्रश्न पत्र में तीन खंड हैं: खंड , और
  • खंड में कुल 2 प्रश्न पूछे गए हैं। दोनों प्रश्नों के कुल 20 उपप्रश्न दिए गए हैं। दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए कुल 10 उपप्रश्नों के उत्तर दीजिए।
  • खंड में 4 प्रश्न हैं तथा इन सभी के 21 उपप्रश्न हैं। इनमें से निर्देशानुसार 16 उपप्रश्नों के उत्तर दीजिए।
  • खंड में कुल 3 प्रश्न हैं तथा 14 उपप्रश्न सम्मिलित हैं सभी उपप्रश्नों के उत्तर दीजिए।

खंड क अपठित गद्यांश (10 अंक)

प्रश्न 1. नीचे दो गद्यांश दिए गए हैं। किसी एक गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प चुनकर दीजिए। (1×10=10)

यदि आप इस गद्यांश का चयन करते हैं तो कृपया उत्तर पुस्तिका में लिखिए कि आप प्रश्न संख्या 1 में दिए गए गद्यांश-1 पर आधारित प्रश्नों के उत्तर लिख रहे हैं।

परिश्रम ‘कल्पवृक्ष’ है। जीवन की कोई भी अभिलाषा परिश्रम रूपी कल्पवृक्ष से पूर्ण हो सकती है। परिश्रम जीवन का आधार है, उज्ज्वल भविष्य का जनक और सफलता की कुंजी है। सृष्टि के आदि से अद्यतन काल तक विकसित सभ्यता और सर्वत्र उन्नति परिश्रम का परिणाम है। आज से लगभग पचास साल पहले कौन कल्पना कर सकता था कि मनुष्य एक दिन चाँद पर कदम रखेगा या अंतरिक्ष में विचरण करेगा पर निरंतर श्रम की बदौलत मनुष्य ने उन कल्पनाओं एवं संभावनाओं को साकार कर दिखाया है। मात्र हाथ पर हाथ धरकर बैठे रहने से कदापि संभव नहीं होता।

किसी देश, राष्ट्र अथवा जाति को उस देश के भौतिक संसाधन तब तक समृद्ध नहीं बना सकते जब तक कि वहाँ के निवासी उन संसाधनों का दोहन करने के लिए अथक परिश्रम नहीं करते । किसी भूभाग की मिट्टी कितनी भी उपजाऊ क्यों न हो, जब तक विधिवत परिश्रमपूर्वक उसमें जुताई, बुआई, सिंचाई, निराई – गुड़ाई नहीं होगी, अच्छी फसल प्राप्त नहीं हो सकती । किसी किसान को कृषि संबंधी अत्याधुनिक कितनी ही सुविधाएँ उपलब्ध करा दीजिए, यदि उसके उपयोग में लाने के लिए समुचित श्रम नहीं होगा, उत्पादन क्षमता में वृद्धि संभव नहीं है। परिश्रम से रेगिस्तान भी अन्न उगलने लगते हैं हमारे देश की स्वतंत्रता के पश्चात हमारी प्रगति की द्रुतगति भी हमारे श्रम का ही फल है। भाखड़ा नांगल का विशाल बाँध हो या थुंबा या श्री हरिकोटा के रॉकेट प्रक्षेपण केंद्र, हरित क्रांति की सफलता हो या कोविड 19 की रोकथाम के लिए टीका तैयार करना, प्रत्येक सफलता हमारे श्रम का परिणाम है तथा प्रमाण भी है।

जीवन में सुख की अभिलाषा सभी को रहती है । बिना श्रम किए भौतिक साधनों को जुटाकर जो सुख प्राप्त करने के फेर में है , वह अंधकार में है । उसे वास्तविक और स्थायी शांति नहीं मिलती । गांधीजी तो कहते थे कि जो बिना श्रम किए भोजन ग्रहण करता है , वह चोरी का अन्न खाता है । ऐसी सफलता मन को शांति देने के बजाए उसे व्यथित करेगी । परिश्रम से दूर रहकर और सुखमय जीवन व्यतीत करने वाले विद्यार्थी को ज्ञान कैसे प्राप्त होगा ? हवाई किले तो सहज ही बन जाते हैं , लेकिन वे हवा के हल्के झोंके से ढह जाते हैं । मन में मधुर कल्पनाओं के सँजोने मात्र से किसी कार्य की सिद्धि नहीं होती । कार्य सिद्धि के लिए उद्यम और सतत उद्यम आवश्यक है । तुलसीदास ने सत्य ही कहा है- सकल पदारथ है जग माहीं करमहीन न पावत नाहीं ।। अर्थात इस दुनिया में सारी चीजें हासिल की जा सकती हैं लेकिन वे कर्महीन व्यक्ति को कभी नहीं मिलती हैं ।

अगर आप भविष्य में सफलता की फसल काटना चाहते हैं , तो आपको उसके लिए बीज आज ही बोने होंगे। आज बीज नहीं बोयेंगे , तो भविष्य में फ़सल काटने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं? पूरा संसार कर्म और फल के सिद्धांत पर चलता है इसलिए कर्म की तरफ आगे बढ़ना होगा।

यदि सही मायनों में सफल होना चाहते हैं तो कर्म में जुट जाएँ और तब तक जुटे रहें जब तक कि सफल न हो जाएँ। अपना एक-एक मिनट अपने लक्ष्य को समर्पित कर दें। काम में जुटने से आपको हर वस्तु मिलेगी जो आप पाना चाहते हैं: सफलता, सम्मान, धन, सुख या जो भी आप चाहते हो।

निम्नलिखित में से निर्देशानुसार सर्वाधिक उपयुक्त विकल्पों का चयन कीजिए।

( 1 ) गद्यांश में परिश्रम को ‘कल्पवृक्ष’ के समान बताया गया है क्योंकि इससे

( क ) भौतिक संसाधन जुटाए जाते हैं
( ख ) परिश्रमी व्यक्ति वृक्ष के समान परोपकारी होता है
( ग ) इच्छा दमन करने का बल प्राप्त होता है
( घ ) व्यक्ति की इच्छाओं की पूर्ण पूर्ति संभव है

उत्तर: ( घ ) व्यक्ति की इच्छाओं की पूर्ण पूर्ति संभव है

( 2 ) गद्यांश में अच्छी फ़सल प्राप्त करने के लिए कहे गए कथन से स्पष्ट होता है कि

( क ) भौतिक संसाधनों का दोहन करना आवश्यक है
( ख ) संसाधनों की तुलना में परिश्रम की भूमिका अधिक है
( ग ) ज्ञान प्राप्त करने के लिए परिश्रम आवश्यक है
( घ ) कष्ट करने से ही कृष्ण मिलते हैं

उत्तर: ( ख ) संसाधनों की तुलना में परिश्रम की भूमिका अधिक है

( 3 ) भारत के परिश्रम के प्रमाण क्या-क्या बताए गए हैं?

( क ) बाँध, कोविड 19 की रोकथाम का टीका, प्रक्षेपण केंद्र
( ख ) कोविड 19 की रोकथाम का टीका, प्रक्षेपण केंद्र, रेगिस्तान
( ग ) कोविड 19 की रोकथाम का टीका, प्रक्षेपण केंद्र, हवाई पट्टियों का निर्माण
( घ ) वृक्षारोपण, कोविड 19 की रोकथाम का टीका, प्रक्षेपण केंद्र

उत्तर: ( क ) बाँध, कोविड 19 की रोकथाम का टीका, प्रक्षेपण केंद्र

( 4 ) कैसे व्यक्ति को अंधकार में बताया गया है?

( क ) श्रमहीन व्यक्ति
( ख ) विश्रामहीन व्यक्ति
( ग ) नेत्रहीन व्यक्ति
( घ ) प्रकाशहीन व्यक्ति

उत्तर: ( क ) श्रमहीन व्यक्ति

( 5 ) “हवाई किले तो सहज ही बन जाते हैं , लेकिन ये हवा के हल्के झोंके से ढह जाते हैं।” इस कथन के द्वारा लेखक कहना चाहता है कि

( क ) तेज़ चक्रवर्ती हवाओं से आवासीय परिसर नष्ट हो जाते हैं
( ख ) हवा का रुख अपने पक्ष में परिश्रम से किया जा सकता है
( ग ) हवाई कल्पनाओं को सदैव सँजोकर रखना असंभव है
( घ ) परिश्रमहीनता से वैयक्तिक उपलब्धि नितांत असंभव है

उत्तर: ( घ ) परिश्रमहीनता से वैयक्तिक उपलब्धि नितांत असंभव है

( 6 ) “सतत उद्यम” से क्या तात्पर्य है?

( क ) निरंतर तपता हुआ उद्यम
( ख ) निरंतर परिश्रम करना
( ग ) सतत उठते जाना
( घ ) ज्ञान का सतत उद्गम

उत्तर: ( ख ) निरंतर परिश्रम करना

( 7 ) किस अवस्था में प्राप्त सफलता मन को व्यथित करेगी?

( क ) सकल पदार्थ द्वारा प्राप्त करने पर
( ख ) भौतिक संसाधनों द्वारा प्राप्त करने पर
( ग ) दूसरों द्वारा किए गए अथक प्रयासों से
( घ ) आसान व श्रमहीन तरीके से प्राप्त करने पर

उत्तर: ( घ ) आसान व श्रमहीन तरीके से प्राप्त करने पर

( 8 ) स्वतंत्रता शब्द में उपसर्ग व प्रत्यय अलग करने पर होगा

( क ) स्व + तंत्र + ता
( ख ) सु + तंत्र + ता
( ग ) स् + वतंत्र + ता
( घ ) स् + वतं + ता

उत्तर: ( क ) स्व + तंत्र + ता

( 9 ) “समुचित” शब्द का अर्थ है

( क ) उपर्युक्त
( ख ) उपयुक्त
( ग ) उपभोक्ता
( घ ) उपक्रम

उत्तर: ( ख ) उपयुक्त

( 10 ) गद्यांश के लिए उपयुक्त शीर्षक है

( क ) परिश्रम और स्वतंत्रता
( ख ) परिश्रम: सफल जीवन का आधार
( ग ) परिश्रम और कल्पना
( घ ) परिश्रम: कल्पना की उड़ान

उत्तर: ( ख ) परिश्रम: सफल जीवन का आधार

अथवा

यदि आप इस गद्यांश का चयन करते हैं तो कृपया उत्तर पुस्तिका में लिखिए कि आप प्रश्न संख्या 1 में दिए गए गद्यांश-2 पर आधारित प्रश्नों के उत्तर लिख रहे हैं।

नीचे दिए गए गद्दयांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प चुनकर लिखिए।

विज्ञान प्रकृति को जानने का महत्वपूर्ण साधन है। भौतिकता आज आधुनिक वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति का स्तर निर्धारित करती है। विज्ञान केवल सत्य, अर्थ और प्रकृति के बारे में उपयोग ही नहीं बल्कि प्रकृति की खोज का एक क्रम है। विज्ञान प्रकृति को जानने का एक महत्वपूर्ण साधन है। यह प्रकृति को जानने के विषय में हमें महत्वपूर्ण और विश्वसनीय ज्ञान देता है। व्यक्ति जिस बात पर विश्वास करता है वही उसका ज्ञान बन जाता है। कुछ लोगों के पास अनुचित ज्ञान होता है और वह उसी ज्ञान को सत्य मानकर उसके अनुसार काम करते हैं। वैज्ञानिकता और आलोचनात्मक विचार उस समय जरूरी होते हैं जब वह विश्वसनीय ज्ञान पर आधारित हो। वैज्ञानिक और आलोचक अक्सर तर्क संगत विचारों का प्रयोग करते हैं। तर्क हमें उचित सोचने पर प्रेरित करते हैं। कुछ लोग तर्क संगत विचारधारा नहीं रखते क्योंकि उन्होंने कभी तर्क करना जीवन में सीखा ही नहीं होता।

प्रकृति वैज्ञानिक और कवि दोनों की ही उपास्या है। दोनों ही उससे निकटतम संबंध स्थापित करने की चेष्टा करते है, किंतु दोनों के दृष्टिकोण में अंतर है। वैज्ञानिक प्रकृति के बाह्य रूप का अवलोकन करता है और सत्य की खोज करता है, परंतु कवि बाह्य रुप पर मुग्ध होकर उससे भावों का तादात्म्य स्थापित करता है। वैज्ञानिक प्रकृति की जिस वस्तु का अवलोकन करता है, उसका सूक्ष्म निरीक्षण भी करता है। चंद्र को देखकर उसके मस्तिष्क में अनेक विचार उठते हैं उसका तापक्रम क्या है, कितने वर्षों में वह पूर्णतः शीतल हो जाएगा, ज्वार भाटे पर उसका क्या प्रभाव होता है, किस प्रकार और किस गति से वह सौर मंडल में परिक्रमा करता है और किन तत्वों से उसका निर्माण हुआ है? वह अपने सूक्ष्म निरीक्षण और अनवरत चिंतन से उसको एक लोक ठहराता है और उस लोक में स्थित ज्वालामुखी पर्वतों तथा जीवनधारियों की खोज करता है। इसी प्रकार वह एक प्रफुल्लित पुष्प को देखकर उसके प्रत्येक अंग का विश्लेषण करने को तैयार हो जाता है। उसका प्रकृति विषयक अध्ययन वस्तुगत होता है। उसकी दृष्टि में विश्लेषण और वर्ग विभाजन की प्रधानता रहती है। वह सत्य और वास्तविकता का पुजारी होता है। कवि की कविता भी प्रत्यक्षावलोकन से प्रस्फुटित होती है वह प्रकृति के साथ अपने भावों का संबंध स्थापित करता है। वह उसमें मानव चेतना का अनुभव करके उसके साथ अपनी आंतरिक भावनाओं का समन्वय करता है। वह तथ्य और भावना के संबंध पर बल देता है। उसका वस्तुवर्णन हृदय की प्रेरणा का परिणाम होता है, वैज्ञानिक की भाँति मस्तिष्क की यांत्रिक प्रक्रिया नहीं। कवियों द्वारा प्रकृति-चित्रण का एक प्रकार ऐसा भी है जिसमें प्रकृति का मानवीकरण कर लिया जाता है अर्थात प्रकृति के तत्त्वों को मानव ही मान लिया जाता है।

प्रकृति में मानवीय क्रियाओं का आरोपण किया जाता है। हिंदी में इस प्रकार का प्रकृति-चित्रण छायावादी कवियों में पाया जाता है। इस प्रकार के प्रकृति-चित्रण में प्रकृति सर्वथा गौण हो जाती है। इसमें प्राकृतिक वस्तुओं के नाम तो रहते हैं परंतु झंकृत चित्रण मानवीय भावनाओं का ही होता है। कवि लहलहाते पौधे का चित्रण न कर खुशी से झूमते हुए बच्चे का चित्रण करने लगता है।

निम्नलिखित में से निर्देशानुसार सर्वाधिक उपयुक्त विकल्पों का चयन कीजिए।

( 1 ) विज्ञान प्रकृति को जानने का एक महत्वपूर्ण साधन है क्योंकि यह-

( क ) समग्र ज्ञान के साथ तादात्म्य स्थापित करता है
( ख ) प्रकृति आधुनिक विज्ञान की उपास्या है
( ग ) महत्वपूर्ण और विश्वसनीय ज्ञान प्रदान करता है
( घ ) आधुनिक वैज्ञानिक का स्तर निर्धारित करता है

उत्तर: ( ग ) महत्वपूर्ण और विश्वसनीय ज्ञान प्रदान करता है

( 2 ) वैज्ञानिक प्रकृति के बाह्य रूप का अवलोकन करते हैं यह कथन दर्शाता है कि वे-

( क ) कवियों की तुलना में अधिक श्रेष्ठ हैं
( ख ) ज्वारभाटे के परिणाम से बचना चाहते हैं
( ग ) वर्ग विभाजन के पक्षधर बने रहना चाहते हैं
( घ ) प्रकृति से अविदूर रहने का प्रयास करते हैं

उत्तर: ( घ ) प्रकृति से अविदूर रहने का प्रयास करते हैं

( 3 ) सूक्ष्म निरीक्षण और अनवरत चिंतन से तात्पर्य है-

( क ) सौर मंडल को एक लोक और परलोक ठहराना
( ख ) छोटी-छोटी सी बातों पर चिंता करना
( ग ) बारीकी से सोचना व निरंतर देखना
( घ ) बारीकी से देखना और निरंतर सोचना

उत्तर: ( घ ) बारीकी से देखना और निरंतर सोचना

( 4 ) कौन अनवरत चिंतन करता है?

( क ) सूक्ष्माचारी
( ख ) विज्ञानोपासक
( ग ) ध्यानविलीन योगी
( घ ) अवसादग्रस्त व्यक्ति

उत्तर: ( ख ) विज्ञानोपासक

( 5 ) कौन वास्तविकता का पुजारी होता है?

( क ) यथार्थवादी
( ख ) काव्यवादी
( ग ) प्रकृतिवादी
( घ ) विज्ञानवादी

उत्तर: ( घ ) विज्ञानवादी

( 6 ) कवि की कविता किससे प्रस्फुटित होती है?

( क ) विचारों के मंथन से
( ख ) प्रकृति के साक्षात दर्शन से
( ग ) भावनाओं की उहापोह से
( घ ) प्रेम की तीव्र इच्छा से

उत्तर: ( ख ) प्रकृति के साक्षात दर्शन से

( 7 ) कवि के संबंध में इनमें से सही तथ्य है-

( क ) ज्वालामुखी के रहस्य जानता है
( ख ) जीवधारियों की खोज करता है
( ग ) सत्य का उपासक नहीं होता
( घ ) प्रफुल्लित पुष्प का अध्ययनकर्ता

उत्तर: ( घ ) प्रफुल्लित पुष्प का अध्ययनकर्ता

( 8 ) उपर्युक्त गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक है-

( क ) कवि की सोच और वैज्ञानिकता
( ख ) प्रकृति के उपासक – कवि और वैज्ञानिक
( ग ) वैज्ञानिक उन्नति और काव्य जगत
( घ ) वैज्ञानिक दृष्टिकोण – अतुलनीय

उत्तर: ( ख ) प्रकृति के उपासक – कवि और वैज्ञानिक

( 9 ) “प्रकृति का मानवीकरण” दर्शाता है कि-

( क ) कल्पना प्रधान व भावोन्मेशयुक्त कविता रची जा रही है
( ख ) मानवीकरण अलंकार का दुरुपयोग हो रहा है
( ग ) प्रकृति व मानव के सामंजस्य से उदित दीप्ति फैल रही है
( घ ) मानव द्वारा प्रकृति का संरक्षण हो रहा है

उत्तर: ( क ) कल्पना प्रधान व भावोन्मेशयुक्त कविता रची जा रही है

( 10 ) लहलहाते पौधे का चित्रण न कर झूमते बच्चे का चित्रण करना दर्शाता है कि-

( क ) कवि भावावेश में विषय से भटक गए हैं
( ख ) प्रकृति के तत्वों को मानव माना है
( ग ) कवि वैज्ञानिक विचारधारा के पक्ष में है
( घ ) कवि विकास स्तर पर ही है

उत्तर: ( ख ) प्रकृति के तत्वों को मानव माना है

प्रश्न 2. नीचे दो काव्यांश दिए गए हैं। किसी एक काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उस पर आधारित प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प चुनकर दीजिए। (1×8=8)

यदि आप इस काव्यांश का चयन करते हैं तो कृपया उत्तर पुस्तिका में लिखिए कि आप प्रश्न संख्या 2 में दिए गए काव्यांश 1 पर आधारित प्रश्नों के उत्तर लिख रहे हैं।

मैंने हँसना सीखा है
मैं नहीं जानती रोना।
बरसा करता पल-पल पर
मेरे जीवन में सोना।
मैं अब तक जान न पाई
कैसी होती है पीड़ा?
हँस-हँस जीवन में कैसे
करती है चिंता क्रीड़ा?
जग है असार सुनती हूँ
मुझको सुख-सार दिखाता।
मेरी आँखों के आगे
सुख का सागर लहराता।
कहते हैं होती जाती
खाली जीवन की प्याली।
पर मैं उसमें पाती हूँ
प्रतिपल मदिरा मतवाली।
उत्साह, उमंग निरंतर
रहते मेरे जीवन में।
उल्लास विजय का हँसता
मेरे मतवाले मन में।
आशा आलोकित करती
मेरे जीवन के प्रतिक्षण
हैं स्वर्ण-सूत्र से वलयित
मेरी असफलता के घन।
सुख भरे सुनहले बादल
रहते हैं मुझको घेरे।
विश्वास, प्रेम, साहस हैं
जीवन के साथी मेरे।

( 1 ) “बरसा करता पल-पल पर मेरे जीवन में सोना।” कवयित्री का “सोना” से अभिप्राय है-

( क ) स्वर्ण
( ख ) कंचन
( ग ) आनन्द
( घ ) आराम

उत्तर: ( ग ) आनन्द

( 2 ) असफलता के बादलों को कवयित्री ने किससे घेरकर रखा है?

( क ) असफलता के बादलों को सोने की छड़ी से घेरकर रखा है।
( ख ) कवयित्री सफलता में भी असफलता की आशा से भरी रहती है।
( ग ) कवयित्री ने असफलता के बादलों को सोने के सूत्र से घेरकर रखा है।
( घ ) बादल के बरसने पर निकलने वाली बूँदों से क्योंकि इनसे नव सृजन होता है।

उत्तर: ( ग ) कवयित्री ने असफलता के बादलों को सोने के सूत्र से घेरकर रखा है।

( 3 ) कवयित्री द्वारा विश्वास, प्रेम और साहस को अपना जीवन साथी बनाकर रखना यह निष्कर्ष निकालता है कि-

( क ) अनुकूल परिस्थितियाँ सदैव वश में नहीं रह सकती।
( ख ) विपरीत परिस्थितियों में भी आशा का दामन नहीं छोड़ना चाहिए।
( ग ) जीवन में हितकारी साथी सदैव साथ होने चाहिए।
( घ ) प्रेम, विश्वास व साहस की डोर सदैव लंबी होती है।

उत्तर: ( ख ) विपरीत परिस्थितियों में भी आशा का दामन नहीं छोड़ना चाहिए।

( 4 ) “मुझको सुख-सार दिखाता” कवयित्री को यह अनुभूति कब होती है? और क्यों? समझाइए।

( क ) जब लोग संसार को साहित्य विहीन बताते हैं क्योंकि अब लोगों की साहित्य के प्रति रुचि पूर्ववत नहीं रही
( ख ) लोगों द्वारा प्रयोजनहीनता दर्शाए जाने पर क्योंकि संसार सुख से भरा हुआ है।
( ग ) जब कवयित्री विशाल सागर को फैले हुए देखती है और प्रसन्न होती हैं।
( घ ) कवयित्री के अनुसार जीवन में केवल खुशियाँ ही हैं क्योंकि उन्होंने कभी पीड़ा को नहीं देखा।

उत्तर: ( ख ) लोगों द्वारा प्रयोजनहीनता दर्शाए जाने पर क्योंकि संसार सुख से भरा हुआ है।

( 5 ) कवयित्री असफलताओं को किस रूप में स्वीकार करती हैं?

( क ) प्रसन्नता के साथ ग्रहण करती हैं।
( ख ) वेदनामयी अवस्था में ग्रहण करती हैं।
( ग ) तिरस्कृत कर देती हैं।
( घ ) हताश होकर स्वीकार करती हैं।

उत्तर: ( क ) प्रसन्नता के साथ ग्रहण करती हैं।

( 6 ) आधुनिक जीवन में भी मनुष्य के सामने अनेक समस्याएँ आती हैं। इस कविता के माध्यम से समस्याओं का समाधान कैसे किया जा सकता है? कविता में निहित संदेश द्वारा स्पष्ट कीजिए।

( क ) मनुष्य हताश होकर सहायतार्थ समस्याओं का हल करने का प्रयास अथक भाव से करे।
( ख ) मनुष्य हताश न हो और समस्याओं का हल करने का प्रयास अथक भाव से करे।
( ग ) निरंतर प्रयासरत रहकर परस्परावलंब से जीवन पथ पर गतिमान रहे।
( घ ) सुख और दुख जीवन में आते जाते रहते हैं।

उत्तर: ( ख ) मनुष्य हताश न हो और समस्याओं का हल करने का प्रयास अथक भाव से करे।

( 7 ) “उत्साह, उमंग निरंतर रहते मेरे जीवन में।” पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है-

( क ) रुपक
( ख ) अनुप्रास
( ग ) श्लेष
( घ ) उपमा

उत्तर: ( ख ) अनुप्रास

( 8 ) कविता के लिए उपयुक्त शीर्षक है-

( क ) सुख और दुख
( ख ) मेरा जीवन
( ग ) मेरा सुख
( घ ) परपीड़ा

उत्तर: ( ख ) मेरा जीवन

यदि आप इस काव्यांश का चयन करते हैं तो कृपया उत्तर पुस्तिका में लिखिए कि आप प्रश्न संख्या 2 में दिए गए काव्यांश 2 पर आधारित प्रश्नों के उत्तर लिख रहे हैं।

एक फ़ाइल ने दूसरी फ़ाइल से कहा
बहन लगता है
साहब हमें छोड़कर जा रहे हैं
इसीलिए तो सारा काम जल्दी जल्दी निपटा रहे हैं।
मैं बार-बार सामने जाती हूँ
रोती हूँ, गिड़गिड़ाती हूँ
करती हूँ विनती हर बार
साहब जी! इधर भी देख लो एक बार।
पर साहब हैं कि
कभी मुझे नीचे पटक देते हैं। कभी पीछे सरका देते हैं
और कभी-कभी तो
फ़ाइलों के ढेर तले
दबा देते हैं
अधिकारी बार-बार अंदर झाँक जाता है
डरते-डरते पूछ जाता है
साहब कहाँ गए हैं?
हस्ताक्षर हो गए?
दूसरी फ़ाइल ने उसे
प्यार से समझाया
जीवन का नया फलसफा सिखाया
बहन! हम यूँ ही रोते हैं
बेकार गिड़गिड़ाते हैं, लोग आते हैं, जाते हैं
हस्ताक्षर कहाँ रुकते हैं
हो ही जाते हैं।
पर कुछ बातें ऐसी होती हैं जो दिखाई नहीं देतीं
और कुछ आवाजें सुनाई नहीं देती
जैसे फूल खिलते हैं
और अपनी महक छोड़ जाते हैं। वैसे ही कुछ लोग कागज पर नहीं
दिलों पर हस्ताक्षर छोड़ जाते हैं।

( 1 ) साहब जल्दी-जल्दी काम क्यों निपटा रहे हैं क्योंकि-

( क ) कदाचित उनका स्थानांतरण हो गया है।
( ख ) आज का काम कल पर नहीं छोड़ना चाहते हैं।
( ग ) कार्यालय की प्रगति की चिंता करते हैं।
( घ ) बड़े साहब कल निरीक्षण करने वाले हैं।

उत्तर: ( क ) कदाचित उनका स्थानांतरण हो गया है।

( 2 ) फाइल क्यों रोती और गिड़गिड़ाती है?

( क ) साहब की स्वार्थपरता के कारण
( ख ) अपना कार्य पूर्ण न होने की पीड़ा के कारण
( ग ) अकेलेपन की असहनीय पीड़ा के कारण
( घ ) फाइल का स्वभाव रोना और गिड़गिड़ाना ही है

उत्तर: ( ख ) अपना कार्य पूर्ण न होने की पीड़ा के कारण

( 3 ) जीवन के फलसफे के अनुसार किसी भी परिस्थिति में-

( क ) हार नहीं माननी चाहिए।
( ख ) विलाप नहीं करना चाहिए।
( ग ) हार से सबक सीखना चाहिए।
( घ ) जीत हार सभी कुछ अंतिम हैं।

उत्तर: ( ख ) विलाप नहीं करना चाहिए।

( 4 ) कविता के अनुसार जो कार्य दिखाई-सुनाई नहीं देते हैं

( क ) वे अस्पष्टता के कारण बेमानी होते हैं
( ख ) वह यह शिक्षा देते हैं कि हमें एकाग्रचित्त होकर सुनना-देखना चाहिए
( ग ) वे लोगों पर अपना प्रभाव छोड़ जाते हैं
( घ ) वे केवल सिद्ध लोगों को ही प्रभावित करते हैं

उत्तर: ( ग ) वे लोगों पर अपना प्रभाव छोड़ जाते हैं

( 5 ) दूसरी फाइल ने पहली फाइल को क्या समझाया?

( क ) कार्य कैसा भी हो समयानुसार हो ही जाता है
( ख ) यदि कार्य उचित हो तभी उसकी पूर्णता संभव है
( ग ) कार्य कर्ता का फल है इसलिए पश्चाताप व्यर्थ है
( घ ) सकारात्मक रहकर ही कार्य को पूर्णता तक पहुँचाना संभव है

उत्तर: ( क ) कार्य कैसा भी हो समयानुसार हो ही जाता है

( 6 ) कविता का संदेश क्या है?

( क ) लोग जल्दी कार्य करने वाले अधिकारी से प्रभावित होते हैं
( ख ) परोपकारी कार्यों से लोग प्रभावित होते हैं
( ग ) कार्यालयों में फाइलों के रूप में कार्य लंबित रहता है
( घ ) कार्यालयों में अधिकारी साहब को ढूँढ़ते रहते हैं

उत्तर: ( क ) लोग जल्दी कार्य करने वाले अधिकारी से प्रभावित होते हैं

( 7 ) किनमें व्यंग्य का भाव छिपा हुआ है?

( क ) साहब हमें छोड़कर जा रहे हैं
( ख ) और अपनी महक छोड़ जाते हैं
( ग ) हस्ताक्षर कहाँ रुकते हैं, हो ही जाते हैं
( घ ) दिलों पर हस्ताक्षर छोड़ जाते हैं

उत्तर: ( ग ) हस्ताक्षर कहाँ रुकते हैं, हो ही जाते हैं

( 8 ) उपर्युक्त काव्यांश का उपयुक्त शीर्षक क्या होगा?

( क ) हृदय स्पर्श
( ख ) जीवन सार
( ग ) जीवन दर्शन
( घ ) भाग्य व कर्म

उत्तर: ( ख ) जीवन सार

प्रश्न 3 निम्नलिखित प्रश्नों को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उत्तर देने के लिए सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए। (1×5=5)

( 1 ) खबर की दृश्यों के अनुपलब्ध होने की स्थिति में रिपोर्टर से मिली जानकारियों के आधार पर सूचनाएँ पहुँचाने वाले का संबंधित चरण है-

( क ) ड्राई रिपोर्ट
( ख ) ड्राई-दृश्यहीनता
( ग ) ड्राई विजुअल
( घ ) ड्राई-एंकर

उत्तर: ( घ ) ड्राई-एंकर

( 2 ) कक्षा बारहवीं का छात्र मयंक रेडियो सुन रहा था। अचानक कुछ शब्द ऐसे आ गए जिनका अर्थ वह नहीं समझ पाया। जब तक उसने शब्दकोश में से अर्थ ढूँढ़ने का प्रयास किया तब तक समाचार समाप्त हो गए थे। यह स्थिति दर्शाती है कि-

( क ) शब्दकोश में प्रतिपादित अर्थ ढूँदना असाध्य है
( ख ) प्रसारित शब्दों की कठिनाई का तत्काल कोई निराकरण नहीं है
( ग ) शब्दों का स्थायित्व अत्यंत लाभदायक सिद्ध होता है
( घ ) समाचारों की भाषा सरल व बोधगम्य होनी चाहिए

उत्तर: ( ख ) प्रसारित शब्दों की कठिनाई का तत्काल कोई निराकरण नहीं है

( 3 ) श्रोताओं या पाठकों को बांध कर रखने की स्थिति में टेलीविज़न सबसे सशक्त माध्यम है क्योंकि यह-

( क ) नियमित एवं निरंतर प्रसारित होता है
( ख ) अधिक प्रामाणिक द्विरेखीय माध्यम है
( ग ) समाचारों के पुष्टिकरण का कार्य करता है
( घ ) दृश्य एवं श्रव्य सुविधा प्रदान करता है

उत्तर: ( घ ) दृश्य एवं श्रव्य सुविधा प्रदान करता है

( 4 ) कविता की अनजानी दुनिया का सबसे पहला उपकरण है-

( क ) मेलजोल
( ख ) शब्द
( ग ) अर्थ
( घ ) अलंकार

उत्तर: ( ख ) शब्द

( 5 ) कवि की वैयक्तिकता में सामाजिकता मिली होती है यह कथन निरूपित करता है

( क ) सामाजिक कुरीतियाँ
( ख ) सामाजिक समरसता
( ग ) समाजवादी अराजकता
( घ ) सामाजिक असमर्थता

उत्तर: ( ख ) सामाजिक समरसता

प्रश्न 4 निम्नलिखित काव्यांश पर आधारित दिए गए पाँच प्रश्नों के सही उत्तर वाले विकल्प चुनिए (1×5=5)

और यह कैलेंडर से मालूम था
अमुक दिन अमुक बार मदन महीने की होवेगी पंचमी
दफ्तर में छुट्टी थी-यह था प्रमाण
और कविताएँ पढ़ते रहने से यह पता था
कि दहर-दहर दहकेंगे कहीं ढाक के जंगल आम बौर आवेंगे
रंग-रस-गंध से लदे-फँदे दूर के विदेश के
वे नंदन-वन होवेंगे यशस्वी मधुमस्त पिक भौर आदि अपना-अपना कृतित्व
अभ्यास करके दिखायेंगे
यही नहीं जाना था कि आज के नगण्य दिन जानूँगा
जैसे मैंने जाना, कि वसंत आया।

( 1 ) “और कविताएँ पढ़ते रहने से _ _ _ _ _ आम बौर आवेंगे” में निहित व्यंग्य कौन से विशेष वर्ग को चयनित करके कहा गया है-

( क ) वन संरक्षण विभाग
( ख ) बौद्धिक वर्ग
( ग ) पर्यावरण विभाग
( घ ) पूंजीपति वर्ग

उत्तर: ( घ ) पूंजीपति वर्ग

( 2 ) कवि द्वारा वसंत पंचमी के होने का प्रमाण छुट्टी बताया जाना इस बात का समर्थन करता है कि-

( क ) वह दफ्तर में एक प्रतिष्ठित व जागरूक अधिकारी है।
( ख ) वह दफ्तर में जारी हुई प्रत्येक सूचना को ध्यानपूर्वक पढ़ता है।
( ग ) वह उत्सुकतावश कैलेंडर में छुट्टियाँ देखता रहता है।
( घ ) वह एकाकी और संकुचित स्वभाव वाला बन गया है।

उत्तर: ( घ ) वह एकाकी और संकुचित स्वभाव वाला बन गया है।

( 3 ) वसंत के आने पर प्रकृति में क्या होता है?

( क ) ढाक के वन दहरने लगते हैं तथा आम में बौर आ जाता है।
( ख ) आम में बौर आ जाता है तथा कैलेंडर फड़फड़ाने लगता है।
( ग ) आम में बौर आ जाता है तथा दफ़तर में छुट्टी होती है।
( घ ) ढाक के वन दहरने लगते हैं तथा कैलेंडर फड़फड़ाने लगता है।

उत्तर: ( घ ) ढाक के वन दहरने लगते हैं तथा कैलेंडर फड़फड़ाने लगता है।

( 4 ) “वे नंदन-वन होवेंगे यशस्वी मधुमस्त पिक भौंर आदि अपना-अपना कृतित्व अभ्यास करके दिखावेंगे” पंक्तियों द्वारा आकलन किया जा सकता है कि-

( क ) कोयल और मस्त भँवरे वसंत के आगमन पर प्रफुल्लित होकर अपने गीत गाएँगे।
( ख ) नव सृजन और रचनात्मक लेखन की अत्यधिक आवश्यकता है।
( ग ) कविगण विदेशों में भँवरे और कोयल की अदाओं की प्रस्तुति द्वारा लाभ प्राप्त करेंगे।
( घ ) कवि ने कोयल और भँवरे की सहज भंगिमाओं का सूक्ष्म अवलोकन किया है।

उत्तर: ( ग ) कविगण विदेशों में भँवरे और कोयल की अदाओं की प्रस्तुति द्वारा लाभ प्राप्त करेंगे।

( 5 ) “दहर-दहर दहकेंगे” में किस अलंकार का प्रयोग है?

( क ) अनुप्रास, उपमा
( ख ) पुनरुक्तिप्रकाश, अनुप्रास
( ग ) पुनरुक्तिप्रकाश, उपमा
( घ ) उत्प्रेक्षा, अनुप्रास

उत्तर: ( ख ) पुनरुक्तिप्रकाश, अनुप्रास

प्रश्न 5 निम्नलिखित पठित गद्यांश पर आधारित दिए गए पाँच प्रश्नों के सही उत्तर वाले विकल्प चुनिए (1×5=5)

चौधरी साहब से तो अब अच्छी तरह परिचय हो गया था। अब उनके यहाँ मेरा जाना एक लेखक की हैसियत से होता था। हम लोग उन्हें एक पुरानी चीज़ समझा करते थे। इस पुरातत्व की दृष्टि में प्रेम और कुतूहल का एक अद्भुत मिश्रण रहता था। यहाँ पर यह कह देना आवश्यक है कि चौधरी साहब एक खासे हिंदुस्तानी रईस थे। वसंत पंचमी, होली इत्यादि अवसरों पर उनके यहाँ खूब नाचरंग और उत्सव हुआ करते थे। उनकी हर एक अदा से रियासत और तबीयतदारी टपकती थी। कंधों तक बाल लटक रहे हैं। आप इधर से उधर टहल रहे हैं। एक छोटा-सा लड़का पान की तश्तरी लिए पीछे-पीछे लगा हुआ है । बात की काँट-छाँट का क्या कहना है! जो बातें उनके मुँह से निकलती थी, उनमें एक विलक्षण वक्रता रहती थी। उनकी बातचीत का ढंग उनके लेखों के ढंग से एकदम निराला होता था। नौकरों तक के साथ उनका संवाद सुनने लायक होता था। अगर किसी नौकर के हाथ से कभी कोई गिलास वगैरह गिरा तो उनके मुँह से यही निकला कि “कारे बचा त नाहीं”।

( 1 ) “इस पुरातत्व की दृष्टि में प्रेम और कुतूहल का एक अद्भुत मिश्रण रहता था।” इस कथन का औचित्य बताइए।

( क ) प्रेम और उत्सुकता का अद्भुत मिश्रण लेखक मंडली में दिखाई देता था।
( ख ) उपाध्याय बद्रीनारायण चौधरी को पुरातत्व की अच्छी जानकारी थी।
( ग ) लेखक मंडली की आयु उपाध्याय बद्रीनारायण चौधरी से बहुत अधिक थी।
( घ ) लेखक मंडली चौधरी साहब को पुराने विचारों वाला आदमी समझती थी।

उत्तर: ( घ ) लेखक मंडली चौधरी साहब को पुराने विचारों वाला आदमी समझती थी।

( 2 ) “उनकी हर एक अदा से रियासत और तबीयतदारी टपकती थी” इसका अभिप्राय है कि-

( क ) पंडित उमाशंकर द्विवेदी एक बहुत बड़ी रियासत के मालिक थे।
( ख ) लेखक और उसके साथियों को बड़ी रियासत प्राप्त हुई थी।
( ग ) उनके पास बहुत बड़ी रियासत थी और तबीयत ठीक नहीं रहती थी।
( घ ) कार्य व्यवहार से रियासत और तबीयतदारी की झलक मिलती थी।

उत्तर: ( घ ) कार्य व्यवहार से रियासत और तबीयतदारी की झलक मिलती थी।

( 3 ) चौधरी साहब कैसे व्यक्ति थे?

( क ) खासे हिंदुस्तानी रईस, कंधों तक बालों वाले
( ख ) क्रोधी स्वभाव के, कंधों तक बालों वाले
( ग ) कंधों तक बालों वाले, स्वार्थी
( घ ) स्वार्थी, खासे हिंदुस्तानी रईस

उत्तर: ( क ) खासे हिंदुस्तानी रईस, कंधों तक बालों वाले

( 4 ) “कारे बचा त नाहीं” कहने से चौधरी साहब प्रदर्शित करते हैं कि वे

( क ) नौकर से गिलास टूटने पर क्रोधित हो रहे हैं।
( ख ) नौकरों को बहुत डाँट – डपटकर रखते हैं।
( ग ) वस्तुओं का नुकसान सहन नहीं करना चाहते हैं।
( घ ) विलक्षणता और चुटीलापन जैसे विशेष गुणों के स्वामी हैं।

उत्तर: ( घ ) विलक्षणता और चुटीलापन जैसे विशेष गुणों के स्वामी हैं।

( 5 ) गद्यांश के अनुसार एक छोटा-सा लड़का पान की तश्तरी लिए चौधरी साहब के पीछे पीछे लगा हुआ है। अनुमान के आधार पर बताइए कि यह लड़का कौन हो सकता है? वर्तमान संदर्भ में यह किस अवस्था को दर्शाता है?

( क ) चौधरी साहब का बेटा, पितृभक्ति
( ख ) चौधरी साहब का भाई, भातृप्रेम
( ग ) चौधरी साहब का नौकर, बाल मज़दूरी
( घ ) चौधरी साहब का प्रशंसक, साहित्य प्रेम

उत्तर: ( ग ) चौधरी साहब का नौकर, बाल मज़दूरी

प्रश्न 6 निम्नलिखित छह भागों में से किन्ही चार प्रश्नों के सही उत्तर वाले विकल्प चुनिए (1×4=4)

( 1 ) बालक के द्वारा यह कहे जाने पर कि मैं यावज्जन्म लोकसेवा करूँगा दर्शाता है कि वह-

( क ) लोक सेवा करना चाहता था।
( ख ) सिखाया हुआ उत्तर दे रहा था।
( ग ) लड्डू खाना चाहता था।
( घ ) ढेले चुनकर उत्तर दे रहा था।

उत्तर: ( ख ) सिखाया हुआ उत्तर दे रहा था।

( 2 ) संवदिया कहानी का प्रतिपाद्य है-

( क ) संवाद का महत्व
( ख ) मानवीय संवेदना
( ग ) ग्रामीण जीवन
( घ ) ज़मीन का बँटवारा

उत्तर: ( ख ) मानवीय संवेदना

( 3 ) “संवाद कहते वक्त बड़ी बहुरिया की आँखें छलछला आई थीं। हरगोबिन सोच रहा था कि किस मुँह: से वह ऐसा संवाद सुनाएगा।” पंक्तियों में समाहित भाव क्रमशः प्रदर्शित करते हैं-

( क ) अनुरक्ति एवं कशमकश
( ख ) संताप एवं किंकर्तव्यविमूढ़ता
( ग ) किंकर्तव्यविमूढ़ता एवं अनुरक्ति
( घ ) आश्रय एवं संताप

उत्तर: ( ख ) संताप एवं किंकर्तव्यविमूढ़ता

( 4 ) आशा को बावली कहने से कवि जयशंकर प्रसाद का मंतव्य है-

( क ) आशा व्यक्ति को काल्पनिक सुख में भरमाए रहती है।
( ख ) देवसेना बावली हो गई थी।
( ग ) आशा संघर्ष में जीवन व्यतीत करती है।
( घ ) आशा देवसेना के रथ पर सवार है।

उत्तर: ( क ) आशा व्यक्ति को काल्पनिक सुख में भरमाए रहती है।

( 5 ) कार्नेलिया का गीत कविता में “उड़ते खग” निम्नलिखित में से किस विशेष अर्थ की व्यंजना करते हैं-

( क ) प्राकृतिक सौंदर्य को देख व्यक्तियों का आनंदित होना।
( ख ) पंख फैलाकर उड़ते पक्षियों का समूह।
( ग ) देश के बाहर से आए हुए व्यक्तियों का समूह।
( घ ) देश के बाहर से आए हुए पक्षियों का समूह।

उत्तर: ( ग ) देश के बाहर से आए हुए व्यक्तियों का समूह।

( 6 ) “तोड़ो तोड़ो तोड़ो ये पत्थर ये चट्टानें”
उपर्युक्त पंक्तियों में पत्थर और चट्टानें किसका प्रतीक हैं?

( क ) प्रकृति
( ख ) परिश्रम
( ग ) वसंत
( घ ) बाधाएँ

उत्तर: ( घ ) बाधाएँ

प्रश्न 7 निम्नलिखित पाँच भागों में से किन्ही तीन प्रश्नों के सही उत्तर वाले विकल्प चुनिए (1×3=3)

( 1 ) “चूल्हा ठंडा किया होता तो दुश्मनों का कलेजा कैसे ठंडा होता” के माध्यम से सूरदास संकेतात्मक रूप से किसे चिह्नित कर रहा है?

( क ) गाँव के लोगों को
( ख ) जगधर को
( ग ) भैरों को
( घ ) मिठुआ को

उत्तर: ( ग ) भैरों को

( 2 ) रूप ने कहा कि आप यहाँ अकेले हैं जबकि भूप ऐसा महसूस नहीं करते हैं क्योंकि वे-

( क ) पहाड़ों पर चढ़ाई करने में अत्यधिक निपुण थे।
( ख ) वहाँ स्वाभिमान का जीवन व्यतीत कर रहे थे।
( ग ) स्वजनों और भूधरों से गहरी आत्मीयता रखते थे।
( घ ) अपनी पत्नी और मवेशियों के साथ रहते थे।

उत्तर: ( ग ) स्वजनों और भूधरों से गहरी आत्मीयता रखते थे।

( 3 ) “हम सौ लाख बार बनाएँगे” इस कथन के संदर्भ में लेखक ने कौन से जीवन मूल्यों को स्थापित किया है?

( क ) गरीबी एवं आत्मविश्वास
( ख ) जुझारूपन एवं आशावादी
( ग ) दृष्टिहीनता एवं नैराश्य
( घ ) सहनशीलता एवं संवेदनहीन

उत्तर: ( ख ) जुझारूपन एवं आशावादी

( 4 ) आरोहण कहानी की मूल संवेदना है-

( क ) पर्वतीय लोगों के जीवन की अनुकूल परिस्थितियाँ
( ख ) भूस्खलन में अपनों को खोने के बाद भी अनुपम पर्वत प्रेम
( ग ) परिश्रमशीलता, आत्मसम्मान एवं पर्वत प्रेम
( घ ) नौकरी के कारण गाँव छोड़ने की मजबूरी

उत्तर: ( ख ) भूस्खलन में अपनों को खोने के बाद भी अनुपम पर्वत प्रेम

( 5 ) “भिखारियों के लिए धन संचय पाप संचय से कम अपमान की बात नहीं है।” अनुमान के आधार पर बताइए सूरदास ने ऐसा क्यों कहा होगा?

( क ) ग्रंथों में धन संचय को पाप संचय माना जाने के कारण
( ख ) ग्रामीण सामाजिक दृष्टिकोण के कारण
( ग ) पूंजीपति व्यवस्था के प्रति अनादर के कारण
( घ ) उसकी चेतना जागृत हो जाने के कारण

उत्तर: ( ख ) ग्रामीण सामाजिक दृष्टिकोण के कारण

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