Economics Sample Paper Class 12 in Hindi Medium

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इस पोस्ट में आप देखोगे Economics Sample Paper Class 12 in Hindi Medium

यानी कि कक्षा 12 के अर्थशास्त्र (Arthashastra) का सैंपल पेपर और उसका pdf, जो 2021 से 2022 के टर्म 2 का है, वो भी hindi medium के विद्यार्थियों के लिए। आपको इसके पीडीएफ को देखने के लिए या download के लिए नीचे दिए लाल बटन जिस पर Economics set-1 लिखा है उस पर क्लिक करना होगा।

Details of the Sample paper

इस पोस्ट में दिए सैंपल पेपर की डिटेल्स निम्नलिखित हैं।

Class12th12वी
SubjectEconomicsअर्थशास्त्र
MediumHindiहिन्दी
Term22
SolvedYesहां
Year2021-20222021-22
BoardCBSEसीबीएसई
FormatPDFपीडीएफ

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cbse sample paper 2021 class 12 in hindi medium

Economics Sample Paper

यहां आप देखोगे अर्थशास्त्र का सेम्पल पेपर कक्षा 12 के 2021-22 का और साथ में pdf download का option

निर्धारित समय : 2 घण्टे
अधिकतम अंक : 40
सामान्य निर्देश:

  • प्रश्न पत्र 3 खंडों ए, बी और सी में बांटा गया है।
  • खंड ए में प्रश्न संख्या 1 से 5 तक 2 अंकों के लघु उत्तरीय प्रश्न हैं। जिनका उत्तर 30-50 शब्दों में देना है।
  • खंड बी में प्रश्न संख्या 6 से 10 तक 3 अंकों के लघु उत्तरीय प्रश्न हैं। जिनका उत्तर 50-80 शब्दों में देना है।
  • खंड सी में प्रश्न संख्या 11 से 13 तक 5 अंकों के दीर्घ उत्तरीय प्रश्न हैं। जिनका उत्तर 80-120 शब्दों में देना है।
  • इस प्रश्न पत्र में केस / स्रोत आधारित प्रश्न हैं।

Section-A / खंड-ए

प्रश्न 1: वास्तविक प्रवाह और मौद्रिक प्रवाह के मध्य अंतर कीजिए।

उत्तर : वास्तविक प्रवाह वास्तविक वस्तुओं या सेवाओं और कारक सेवाओं के प्रवाह को संदर्भित करता है, जबकि मौद्रिक प्रवाह उत्पादन के कारकों (उदाहरण मजदूरी) के लिए भुगतान और उपभोग व्यय के लिए मुद्रा के प्रवाह को संदर्भित करता है।

अथवा

प्रश्न : पूंजीगत वस्तुओं और उपभोग वस्तुओं में उदाहरण सहित भेद कीजिए।

उत्तर : पूंजीगत वस्तएँ वे अंतिम वस्तुएँ हैं जो अन्य वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन में सहायता करती हैं। उदाहरण के लिए एक उत्पादक द्वारा खरीदी गई मशीनरी।

उपभोग वस्तुएँ उन वस्तुओं को संदर्भित करती हैं जो उपभोक्ताओं की आवश्यकताओं को सीधे संतुष्ट करती हैं उदाहरण के लिए गृहस्थों द्वारा क्रय किया गया दूध।

(एक साथ मूल्यांकित किया जाए)

प्रश्न 2: निम्नलिखित में से किसका मान एक से अधिक हो सकता है और क्यों?

  1. सीमांत उपभोग प्रवृत्ति (एमपीसी)
  2. औसत उपभोग प्रवृत्ति (एपीसी)

उत्तर : औसत उपभोग प्रवृत्ति (APC) का मान एक से अधिक हो सकता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि स्वायत्त उपभोग के कारण कुल उपभोग, कुल आय से अधिक हो सकता है।

अथवा

प्रश्न : निम्नलिखित तालिका को पूरा करें।

उपभोग व्यय (रु.)बचत (रु.)आय (रु.)सीमांत उपभोग प्रवृत्ति
10050150
175250
250100

उत्तर :

उपभोग व्यय (रु.)बचत (रु.)आय (रु.)सीमांत उपभोग प्रवृत्ति
10050150
1757525075 / 100 = 0.75
25010035075 / 100 = 0.75

प्रश्न 3: औसत बचत प्रवृत्ति का अर्थ बताइए। इसका औसत उपभोग प्रवृत्ति से क्या संबंध है?

उत्तर : कुल बचत और कुल आय के अनपात को औसत बचत प्रवृत्ति (APS) के रूप में जाना जाता है। कुल बचत को कुल आय से विभाजित करके हमें APS मिलता है।
प्रतीकात्मक रूप से, APS = S/Y
APC और APS का योग एक के बराबर होता है।
APC + APS = 1

प्रश्न 4: ग्रामीण क्षेत्रों में परिवार सामान्‍यतया लकड़ी, उपले या अन्य जैव-ईंधन का उपयोग ईंधन के रूप में करते हैं। इस व्यवहार के कई प्रतिकूल प्रभाव हैं। इसके निहितार्थ बताइये।

उत्तर :

  1. वन-विनाश
  2. हरित आवरण में कमी
  3. मवेशियों के गोबर का दुरुपयोग
  4. वायु प्रदूषण
  5. स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव

(कोई चार)

प्रश्न 5: आधारिक संरचना के दो प्रकार क्या हैं? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

उत्तर : आधारिक संरचना को दो वर्गों में वर्गीकृत किया गया है।

  1. आर्थिक आधारिक संरचना: यह उस आधारिक संरचना को संदर्भित करता है जो उत्पादन और वितरण की प्रक्रिया में मदद करता है, यह आर्थिक संसाधनों की गुणवत्ता में सुधार करके उत्पादकता बढ़ाता है। उदाहरण ऊर्जा, परिवहन, संचार आदि।
  2. सामाजिक आधारिक संरचना: वे सभी सुविधाएं और संस्थाएं जो मानव पूंजी की गुणवत्ता को बढ़ाती हैं, सामाजिक आधारिक संरचना कहलाती हैं। जैसे स्कूल, अस्पताल, आवास सुविधाएं आदि।

अथवा

प्रश्न : ‘पर्यावरण की धारण क्षमता’ के अर्थ की व्याख्या कीजिये। यह पर्यावरण संकट से कैसे संबंधित है?

उत्तर : ‘पर्यावरण की धारण क्षमता’ से तात्पर्य है।

  1. संसाधन निष्कर्षण संसाधन पुनर्जनन की दर से कम रहना चाहिए।
  2. उत्पन्न अवशेष पर्यावरण की अवशोषण क्षमता के भीतर रहना चाहिए।

यदि इन दोनों पहलुओं को पूरा नहीं किया जाता है, तो पर्यावरण जीवन पोषण के अपने महत्वपूर्ण कार्य को करने में विफल रहता है और यह पर्यावरण संकट की स्थिति की ओर जाता है।

Section-B / खंड-बी

प्रश्न 6: एक अर्थव्यवस्था का उपभोग फलन C = 100 + 0.8Y है।
(अ) स्वायत्त उपभोग का मान क्‍या है?
(ब) उपभोग वक्र का ढलान क्‍या होगा?
(स) समस्तर बिंदु पर आय का स्तर क्या है?

उत्तर : उपभोग फलन से C = 100 + 0.8Y,
(अ) स्वायत्त उपभोग = रु० 100
(ब) उपभोग फलन का ढाल = MPC = 0.8
(स) समविच्छेद बिंदु पर, C = Y
100 + 0.8Y = Y
Y – 0.8Y = 100
0.2Y = 100
Y = 100/0.2 = 500
इसलिए, समविच्छेद बिंदु पर आय का स्तर = रु० 500

अथवा

प्रश्न: अर्थव्यवस्था में क्या परिवर्तन होगा यदि समग्र मांग, समग्र आपूर्ति से अधिक हो जाती है?

उत्तर : ऐसी स्थिति में निम्नलिखित परिवर्तन होगा।

  1. यह समग्र मांग > समग्र आपूर्ति (AD > AS) की स्थिति है।
  2. उत्पादक अपने मालसूची स्टॉक का उपयोग कर लेते हैं जिससे मालसूची में कमी आ जाती है।
  3. मालसूची स्टॉक के वांछित स्तर को बनाए रखने के लिए, उत्पादक अधिक उत्पादन करने की योजना बनाते हैं।
  4. उत्पादन में वृद्धि से AS में वृद्धि होती है।
  5. यह तब तक चलता रहता है जंब तक AD = AS नही हो जाता।

(पूरा एक साथ अंकित किया जाए)

प्रश्न 7: भारत में पुरुषों की तुलना में महिला कार्यबल का प्रतिशत कम है। क्यों?

उत्तर : भारत मे पुरुषों की तुलना में महिला कार्यबल का प्रतिशत कम है क्योंकि:

  1. श्रम का लिंग आधारित सामाजिक विभाजन: यह माना जाता है कि पुरुष वित्तीय जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए हैं और महिलाएं घरेलू काम-काज करने के लिए हैं।
  2. भारत में महिला शिक्षा अभी भी दूर की कौड़ी है, जिसके फलस्वरूप नौकरियों के अवसर कम मिलते।
  3. अधिकांश परिवारों में, महिलाओं के लिए नौकरी और काम अभी भी व्यक्तिगत निर्णय के
    बजाय परिवार के निर्णय से नियंत्रित होता है।
  4. महिलाओं द्वारा किये जाने वाले घरेलू कार्यकलापों को काम के रूप में मान्यता नहीं दी जाती है।

(कोई तीन उपयुक्त कारण)

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यान से पढ़ें और नीचे दिए गए प्रश्न संख्या 8 और 9 का उत्तर दें:

चीन और भारत दुनिया की दो उभरती अर्थव्यवस्थाएं हैं। 2024 तक, चीन और भारत मौद्रिक आधार पर क्रमशः दुनिया की दूसरी और पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं। पीपीपी के आधार पर चीन पहले और भारत तीसरे स्थान पर है। दोनों देश कुल वैश्विक संपत्ति का क्रमशः 21% और 26% मौद्रिक और पीपीपी शर्तों में साझा करते हैं। एशियाई देशों में, चीन और भारत मिलकर एशिया के सकल घरेलू उत्पाद में आधे से अधिक का योगदान करते हैं।

1987 में दोनों देशों की जीडीपी (मौद्रिक) लगभग बराबर थी, पीपीपी के लिहाज से भी चीन 1990 में भारत से थोड़ा आगे था। अब 2021 में चीन की जीडीपी भारत से 5.46 गुना ज्यादा है। पीपीपी आधार पर चीन की जीडीपी भारत का 2.6 गुना है। चीन ने 1998 में 1 ट्रिलियन डॉलर का आंकड़ा पार किया, जबकि भारत ने 9 साल बाद 2007 में विनिमय दर के आधार पर पार किया।

दोनों देश 1990 तक प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद के मामले में आमने-सामने रहे हैं। दोनों तरीकों के अनुसार, भारत 1990 में चीन से अधिक अमीर था। 2021 में, चीन मौद्रिक विधि मामले में भारत की तुलना में लगभग 5.4 गुना और पीपीपी विधि में दुनिया में 2.58 गुना अधिक अमीर है। चीन और भारत का प्रति व्यक्ति रैंक क्रमशः 63वां और 147वां है। पीपीपी में चीन और भारत का प्रति व्यक्ति रैंक 76वां और 130वां है।

चीन ने 1970 में 19.30% की अधिकतम जीडीपी विकास दर और 1961 में न्यूनतम -27.27% प्राप्त की। भारत 1988 में 9.63% के सर्वकालिक उच्च और 1979 में -5.24% के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। 1961 से 2019 तक, चीन ने 22 वर्षों में 10% से अधिक की वृद्धि की, भारत ने इतनी वृद्धि कभी नहीं की। चीन और भारत के लिए क्रमशः पांच और चार वर्षों में जीडीपी विकास दर नकारात्मक रही थी।

सीआईए फेक्टबुक के अनुसार, 2017 में भारत की क्षेत्रवार जीडीपी संरचना इस प्रकार है: कृषि (15.4%), उद्योग (23%), और सेवाएं (61.5%)। 2017 में चीन की क्षैत्रवार जीडीपी संरचना कृषि (8.3%), उद्योग (39.5%), और सेवाएं (52.2%) हैं।

प्रश्न 8: सुधारों के बाद चीन की विभिन्‍न विकास रणनीतियों की संक्षेप में व्याख्या कीजिए।

उत्तर : 1978 से चीन ने कई सुधारों को चरणबद्ध तरीके से लागू कला शुरू किया। सुधार कृषि, विदेश व्यापार और निवेश क्षेत्र में शुरु किए गए थे। कृषि में, भूमि को छोट-छोटे भूखंडों में विभाजित किया गया जिसे अलग-अलग परिवारों को आवंटित किया गया। उन्हें करों का भुगतान करने के बाद भूमि से सभी आय रखने की अनुमति दी गई। बाद के चरण में, औद्योगिक क्षेत्र में सुधार शुरू किए गए। विशेष रूप से स्थानीय समूहों के स्वामित्व और संचालित सभी उदयमों को वस्तुओं का उत्पादन करने की अनुमति दी गई। विशेष आर्थिक क्षेत्रों की स्थापना की गई।

(पूरा एक साथ अंकित किया जाए)

प्रश्न 9: चीन द्वारा 1958 में शुरू किए गए “ग्रेट लीप फॉरवर्ड अभियान” की व्याख्या कीजिए।

उत्तर : चीन में ग्रेट लीप फॉरवर्ड अभियान देश के ग्रामीण क्षेत्रो में बड़े पैमाने पर औद्योगीकरण के उददेश्य से 1958 में शुरू किया गया। ग्रामीण क्षेत्र में लोगो को अपने घर के पिछवाड़े में उद्योग स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। कम्यून पद्धति के अंतर्गत कम्यून्स शुरू किए गए जिसमे लोगों ने सामूहिक रूप से खेती की। अभियान कई समस्याओं के कारण सफल नही हो सका।

गंभीर सूखे ने कहर बरपाया चीन में लगभग 30 मिलियन लोग मारे गए। जब रूस का चीन के साथ विवाद हुआ तो उसने अपने विशेषज्ञों को वापस बुला लिया, जिन्हें पहले औद्योगीकरण प्रक्रिया में मदद करने के लिए चीन भेजा गया था।

(पूरा एक साथ अंकित किया जाए)

प्रश्न 10: घरेलू आय और राष्ट्रीय आय में अंतर स्पष्ट कीजिए। घरेलू आय राष्ट्रीय आय से अधिक कब हो सकती है?

उत्तर :
घरेलू आय:- घरेलू आय एक लेखा वर्ष के दौरान किसी देश के घरेलू सीमा में स्थित सभी उत्पादन इकाइयों द्वारा उत्पन्न कारक आय का कुल का कुल योग है। यह पूरी तरह से एक घरेलू अवधारणा है जिसमे किसी देश के घरेलू क्षेत्र में सभी लोगों दवारा अर्जित आय शामिल है, चाहे वह देश के निवासी हों अथवा गैर-निवासी। इसमें विदेशों से शुद्ध साधन आय (NFIA) शामिल नहीं है।

राष्ट्रीय आय:- राष्ट्रीय आय को एक लेखा वर्ष के दौरान अर्जित उस कारक आय (जैसे किराया, मजदूरी, ब्याज और लाभ ) के कुल योग के रूप में परिभाषित किया जाता है जो देश के सामान्य निवासियों को उनकी उत्पादक सेवाओं के लिए दी जाती है। इसमें देश में गैर-निवासियों द्वारा अर्जित आय को घटाता है जिसे विदेशों में प्रेषित किया जाता है, और विदेशों से देश के निवासियों दवारा अर्जित कारक आय को जोड़ा जाता है। इसमें विदेशों से शुद्ध साधन आय (NFIA) शामिल है।

घरेलू आय, राष्ट्रीय आय से अधिक हो सकती है जब विदेशों से शुद्ध साधन आय (NFIA) का मूल्य ऋणात्मक हो।

Section-C / खंड- सी

प्रश्न 11: स्फीतिक अंतराल क्या है? एक चित्र की सहायता से इसे स्पष्ट कीजिए। इस अंतराल को कम करने के लिए दो मौद्रिक उपायों की व्याख्या करें।

उत्तर : पूर्ण रोज़गार स्तर पर, समग्र पूर्ति की तुलना में समग्र मांग की अधिकता को स्फीतिक अंतराल कहा जाता है।
स्फीतिक अंतराल (FE) अतिरिक्त मांग का माप है और पूर्ण रोजगार पर वास्तविक समग्र मांग (FM) और पूर्ण रोजगार स्तर हेतु आवश्यक समग्र मांग (EM) के बीच के अंतर के बराबर है।
स्फीतिक अंतराल (FE) = FM – EM

[यहां आपको एक चित्र बनानी होगी जिसे देखने के लिए आप इस लिंक पर क्लिक कर सकते हैं ]

स्फीतिक अंतराल को ठीक करने के मौद्रिक उपाय:

  1. वैधानिक तरलता अनुपात (SLR) – एक बैंक की कुल संपत्ति का एक निश्चित प्रतिशत नकद या अन्य तरल संपत्ति के रूप में संदर्भित करता है जिसे बैंक द्वारा बनाए रखा जाना आवश्यक है। स्फीतिक अंतराल की स्थिति में एसएलआर को बढ़ाया जाता है। यह वाणिज्यिक बैंकों की साख सृजन क्षमता को कम करता है और अर्थव्यवस्था में मुद्रा के प्रवाह को कम करता है। इसके परिणामस्वरूप, समग्र मांग कम हो जाती है और अंततः अर्थव्यवस्था संतुलन प्राप्त कर लेती है।
  2. रेपो दर: वह दर है जिस पर केंद्रीय बैंक वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकाल के लिए राशि उधार देता है। स्फीतिक अंतराल को ठीक करने के लिए रेपो दर में वृद्धि की जाती है। जिसके कारण, वाणिज्यिक बैंक ब्याज की बाजार दर बढ़ाते हैं (वह दर जिस पर वाणिज्यिक बैंक उपभोक्ताओं और निवेशकों को पैसा उधार देते हैं)। इससे ऋण की मांग कम हो जाती है। परिणामस्वरूप, उपभोग व्यय और निवेश व्यय कम हो जाते हैं जो स्फीतिक अंतराल को ठीक करने हैतु समग्र मांग में कमी के लिए आवश्यक हैं।

प्रश्न 12:

(अ) निम्नलिखित आंकड़ों से ‘बिक्री’ की गणना करें।

मदरु. ( लाख में )
1. मध्यवर्ती लागत240
2. अचल पूंजी का उपयोग40
3. स्टॉक में परिवर्तन(-)60
4. अप्रत्यक्ष कर30
5. साधन लागत पर शुद्ध मूल्य वृद्धि300

(ब) कारण बताते हुए समझाइये कि राष्ट्रीय आय के आकलन में निम्नलिखित के साथ क्या व्यवहार किया जाना चाहिए।

  1. एक फर्म द्वारा निगम कर का भुगतान।
  2. एक कारखाने के मालिक द्वारा स्वयं के उपयोग के लिए मशीनरी की खरीद।

उत्तर :
(अ) बिक्री = कारक लागत पर शुद्ध मूल्य वृद्धि – स्टॉक में परिवर्तन + मध्यवर्ती लागत + अचल पूंजी का उपभोग + शुद्ध अप्रत्यक्ष कर
= 300 – (-) 60 + 240 + 40 + (30 – 0) = 670
बिक्री = ₹670 लाख।
(ब)

  1. नहीं, राष्ट्रीय आय में शामिल नहीं है क्योंकि यह एक हस्तांतरण भुगतान है। यह उत्पादन
    कारकों द्वारा प्राप्त नहीं होता है। इसलिए एक कारक आय नहीं है।
  2. हां, राष्ट्रीय आय के आकलन में शामिल है क्योंकि यह फर्म/कारखाने का अंतिम निवेश व्यय है।

अथवा

प्रश्न:

(अ) निम्नलिखित आँकड़ों से राष्ट्रीय आय की गणना कीजिए।

मदरु. ( करोड़ में )
1. स्वरोज़गार की मिश्रित आय700
2. शुद्ध घरेलू पूंजी निर्माण400
3. प्रचालन अधिशेष720
4. कर्मचारियों का पारिश्रमिक1900
5. शुद्ध अप्रत्यक्ष कर400
6. विदेशों को शुद्ध साधन आय20
7. ब्याज150
8. अचल पूंजी का उपभोग20

(ब) सभी मशीनें पूजीगत वस्तुएं नहीं होती हैं। व्याख्या कीजिए।

उत्तर :
(अ)
साधन लागत पर शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद (NNPfc) = कर्मचारियों का पारिश्रमिक + स्वनियोजितों की मिश्रित आय + प्रचालन अधिशेष + विदेश से शुद्ध कारक आय
= 1900 + 700 + 720 + (-20) = 3320 – 20 = ₹3300 करोड़
(ब) मशीनों का अंतिम उपयोग यह निर्धारित करता है कि यह पूंजीगत वस्तु है या नहीं। पूंजीगत वस्तुएं उत्पादकों की वे अचल संपत्तियां हैं जिनका उपयोग कई वर्षों तक उत्पादन की प्रक्रिया में किया जाता है और जो उच्च मूल्य के होते हैं। इसलिए केवल वे मशीनें जिनका उपयोग आगे के उत्पादन के लिए किया जाता हैं, पूंजीगत वस्तुएं हैं।

प्रश्न 13:
(अ) 2020 के मध्य में, भारत के चिकित्सा पर्यटन क्षेत्र का मूल्य 5-6 बिलियन अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान लगाया गया था। भारत चिकित्सा पर्यटन के लिए एक गंतव्य केंद्र के रूप में उभर रहा है। मान्य तर्कों के साथ कथन का समर्थन कीजिए।
(ब) पर्यावरण के क्या कार्य हैं? कोई तीन कार्य बताइये।

उत्तर :
(अ)
दिए गए कथन का समर्थन किया जाता है क्योंकि भारत मे विश्व स्तर के डॉक्टरों की उपलब्धता और सस्ती कीमतों पर विश्व स्तरीय उपचार उपलब्ध है। भारत में अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी और मज़बूत फार्मा क्षेत्र वाले अस्पताल है।
(ब) पर्यावरण के कार्य हैं:

  1. उत्पादन के लिए संसाधन प्रदान करना – पर्यावरण नवीकरणीय और गैर-नवीकरणीय संसाधनो
    की पूर्ति करता है। पर्यावरण द्वारा उपलब्ध कराए गए प्राकतिक संसाधनों का उपयोग उत्पादन में आगत के रुप में किया जाता है।
  2. अपशिष्ट को आत्मसात करता है – उत्पादन और उपभोग गतिविधियों की प्रक्रिया से बहुत
    अधिक अपशिष्ट उत्पन्न होता है, जिसे पर्यावरण द्वारा अवशोषित किया जाता है।
  3. नैसर्गिक सेवाएं – पर्यावरण में भूमि, जंगल, जल निकाय, वर्षा, वायु, वातावरण आदि शामिल हैं। लोग इन तत्वों (जैसे हिल स्टेशन) की प्राकतिक सुंदरता का आनंद लेते हैं। ऐसे तत्व जीवन की गुणवत्ता में सधार लाने में मदद करते हैं।
  4. जीवन को बनाए रखना – जीवन की कछ बुनियादी जरूरतें (मिट्टी, पानी, हवा) पर्यावरण का हिस्सा हैं। तो एक शांत वातावरण इन आवश्यक तत्वों को प्रदान करके जीवन का निर्वाह करता है।

(कोई तीन उपयुक्त कारण)

Download the Economics Sample Paper

आपको इसके पीडीएफ को देखने के लिए या डाउनलोड के लिए नीचे दिए बटन जिस पर Economics set-1 लिखा है उस पर क्लिक करना होगा, जिसके बाद आपको 15 सेकण्ड्स तक इंतेज़ार करना होगा और जैसे ही टाइमर पूरा होगा तभी आपके सामने हरा रंग का बटन प्रकट होगा जिस पर Now you can download set-1 लिखा होगा, जिसे दबाते ही आपके सामने google drive का एक पेज खुल जाएगा जहां आपको वह पीडीएफ मिल जाएगा।

मुमकिन हैं कि आपको गूगल ड्राइव में जाने के लिए कोई ई-मेल अकाउंट से लोग इन करना पड़े लेकिन अगर आप अपने ई-मेल अकाउंट से लोग इन नहीं करना चाहते हैं तो आप इस पोस्ट को इंकॉग्निटो टैब में खोल सकते हैं तब आपको किसी भी ई-मेल अकाउंट से लोग इन नहीं करना पड़ेगा।

Economics set-1

Thank you 😍

बहुत बहुत शुक्रिया मेरे इस पोस्ट को पढ़ने के लिए 🙏
और आपसे एक बिनती है कि आप मेरे इस पोस्ट हो सके तो share करें और comment box में अपनी राय लिखे इस पोस्ट के बारे में। जिससे कि इस पोस्ट की reach बढ़ सके।
Have a nice day 😘

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